ज़ाइडस ने भारत में लॉन्च किया सेमाग्लूटाइड इंजेक्शन, नई पेन डिवाइस से मरीजों को मिलेगा आसान विकल्प
यह नई पेन डिवाइस प्री-फिल्ड कार्ट्रिज के रूप में मरीजों के लिए उपलब्ध होगी, जिस पर कंपनी के पास विशेष अधिकार हैं। इसे एक आसान और पेशेंट-फ्रेंडली री-यूजेबल पेन के जरिए दिया जाएगा
सेमाग्लिन टीएम, माशेमा टीएम और अल्टरमे टीएम ब्रांड नामों के तहत दवा को किया गया लॉन्च
दिल्ली, मार्च, 2026 : नवाचार पर आधारित एक वैश्विक लाइफसाइंसेज़ कंपनी ज़ाइडस लाइफसाइंसेज़ लिमिटेड (अपनी सहायक कंपनियों सहित, आगे 'ज़ाइडस' कहा जाएगा), ने भारत में पेटेंट खत्म होने के बाद सेमाग्लूटाइड इंजेक्शन को सेमाग्लिन टीएम, माशेमा टीएम और अल्टरमे टीएम ब्रांड नामों से लॉन्च किया है। ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (डीसीजीआई) ने पहले ही टाइप 2 डायबिटीज मेलिटस और मोटापे के इलाज के लिए इस इंजेक्शन की मैन्युफैक्चरिंग और मार्केटिंग की मंजूरी दे दी थी।
मौजूदा इलाज के तरीकों में मरीजों को अक्सर डोज़ धीरे-धीरे बढ़ाने के साथ कई सिंगल-डोज़ पेन खरीदने पड़ते हैं, लेकिन ज़ाइडस ने एक नया और अलग तरह का दोबारा इस्तेमाल होने वाला मल्टी-डोज़ पेन पेश किया है। इस पेन की मदद से डॉक्टर और मरीज एक ही पेन से अलग-अलग डोज़ आसानी से चुनकर ले सकेंगे। इससे इलाज को जारी रखना आसान होगा, सुविधा बढ़ेगी और कुल खर्च भी काफी कम हो जाएगा। ज़ाइडस का सेमाग्लूटाइड इंजेक्शन 15 मिलीग्राम/3 मिलीलीटर कार्ट्रिज में उपलब्ध होगा और इसकी मैन्युफैक्चरिंग अहमदाबाद स्थित ज़ाइडस बायोटेक पार्क में किया जाएगा। इस इलाज की औसत मासिक लागत लगभग 2,200 रुपए रहेगी।
आज के समय में डायबिटीज और मोटापा भारत की सबसे बड़ी स्वास्थ्य समस्याओं में शामिल हैं। जीएलपी-1 पर आधारित इलाज इन बढ़ती समस्याओं को संभालने में अहम् भूमिका निभा सकता है। इंटरनेशनल डायबिटीज फेडरेशन के अनुसार, भारत में करीब 8.9 करोड़ वयस्क डायबिटीज के साथ जी रहे हैं, जो देश की वयस्क आबादी का 10.5 प्रतिशत है। वहीं, मोटापा भी तेजी से बढ़ रहा है। महिलाओं में यह 12.6 प्रतिशत से बढ़कर 24.0 प्रतिशत हो गया है, यानि 91 प्रतिशत की बढ़ोतरी, जबकि पुरुषों में 9.3 प्रतिशत से बढ़कर 22.9 प्रतिशत हो गया है, जो 146 प्रतिशत की बढ़त है। ये आँकड़ें स्पष्ट करते हैं कि देश में यह समस्या तेजी से गंभीर होती जा रही है।